BLOG DESIGNED BYअरुन शर्मा 'अनन्त'

शुक्रवार, 2 अगस्त 2013

कच्चे धागे



 पिरोयी  माला
चुन मुक्तक  सच्चे
धागे थे कच्चे

तोड़ो भी मौन
बादल  या सूरज
तुम  हो कौन.??

जग के नाते
पल पल बदले
ऋतु हसते

एक बीहड़
जाने कब पनपा. !!
मेरे भीतर

रात चाँदनी
गहराया है तम
हिय प्रांगन

नारी चेतना
स्वर्णिम पैजनिया
वही वेदना