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शनिवार, 27 जुलाई 2013

हँसे सुमन



प्रदीप चौबे जी की रचना से प्रेरित हाइकु …. 

पसीना सींचे 
हुजूम के हुजूम 
फूल है उगे  | 

हँसे सुमन 
बहारों की साजिश 
लूटा चमन | 

लौटा सावन 
लौटेंगी बहारे भी 
संग साजन /उम्मीदें हरी | 

रुकी कलम 
तड्पी रोशनाई 
घुटता दम  |