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मंगलवार, 7 मई 2013

हरसिंगार/ उड़ान;.... तांका


हरसिंगार
1
नि:शब्द निशा
चटकता यौवन
महकी हवा
अभिसारिका धरा
स्तब्ध निहारे  उषा ।

उड़ान

2
सजे नभ पे
तेरे नैनो के मोती
चन्द्रहार -से
चुग लाता मैं यदि
छू पाता वो आकाश ।

3
ऊँची उड़ान
नशा कामयाबी का
अरे नादान
बेबस ऑंखें तकें
घर  जा परिंदे 

ये सभी तांका  त्रिवेणी में प्रकाशित हो चुके है।जिसका लिंक यहाँ दिया जा रहा है।
http://trivenni.blogspot.in/2013/05/blog-post_7.html

7 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. Kailash Sharma ji ... hardik abhaar ... apki pratikriya me mere utsaah ko doguna kar diya :) koi truti ho to kripya margdasan bhi karte rahe ..kyuki me to vidyarthi hu abhi :)

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  2. सुंदर और प्रभावी पंक्तियाँ ....आप भी पधारो ..http://pankajkrsah.blogspot.com

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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