BLOG DESIGNED BYअरुन शर्मा 'अनन्त'

मंगलवार, 7 मई 2013

हरसिंगार/ उड़ान;.... तांका


हरसिंगार
1
नि:शब्द निशा
चटकता यौवन
महकी हवा
अभिसारिका धरा
स्तब्ध निहारे  उषा ।

उड़ान

2
सजे नभ पे
तेरे नैनो के मोती
चन्द्रहार -से
चुग लाता मैं यदि
छू पाता वो आकाश ।

3
ऊँची उड़ान
नशा कामयाबी का
अरे नादान
बेबस ऑंखें तकें
घर  जा परिंदे 

ये सभी तांका  त्रिवेणी में प्रकाशित हो चुके है।जिसका लिंक यहाँ दिया जा रहा है।
http://trivenni.blogspot.in/2013/05/blog-post_7.html