२)
प्रतियोगिता
हारता बचपन
जीते मां बाप
सुनीता अग्रवाल नेह
३)
लदे है दिन
राजा रानी के संग
दादी नानी के ।
४)
कागज़ी नौका
बचपन की यादें
हुई सवार ।
14/11/2025
यह हाइकु पढ़ते ही मन सीधे बचपन की गलियों में पहुँच जाता है। आपने बहुत छोटे शब्दों में बहुत बड़ी भावना पकड़ ली है। दादी के किस्से, कागज़ की नाव और खेलता हुआ बचपन, सब आँखों के सामने जीवित हो उठते हैं।
यह हाइकु पढ़ते ही मन सीधे बचपन की गलियों में पहुँच जाता है। आपने बहुत छोटे शब्दों में बहुत बड़ी भावना पकड़ ली है। दादी के किस्से, कागज़ की नाव और खेलता हुआ बचपन, सब आँखों के सामने जीवित हो उठते हैं।
जवाब देंहटाएं