BLOG DESIGNED BYअरुन शर्मा 'अनन्त'

शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2014

खुशबू बाकी





खुली किताब 

देता वही खुशबू 
सूखा गुलाब 

खोली किताब 
महका फिर आज 
सूखा गुलाब

जले जोनाकी 
मुरझाया गुलाब
खुशबू बाकी

सोमवार, 3 फ़रवरी 2014

जय माँ शारदे




बुद्धिदायिनी 

श्वेतवस्त्रावृता  माँ 
हंसावाहिनी
कर दो उज्जवल
अंतर्मन  हमारा 




वीणावादिनी
छेड़ तू सरगम
ज्ञानदायिनी

 आम्र मंजरी
दूँ पुष्पांजलि माते
भर अंजुरी




जग मायावी
हम बच्चे  अबोध
ज्ञानदायिनी 
है शरण  तिहारे 
दे बुद्धि विवेक माँ
                                

गुरुवार, 9 जनवरी 2014

पूस कि रात


झीनी  चादर
दे  गयी  गर्माहट

गगन  तले


सर्द हवाएं
करती  अट्टहास
कांपती धरा




छँटें बादल
अम्बर ने बिखेरे
ख़ुशी के रंग

रेशमी धुंध
फूलों ने पहनी है
श्वेतवल्लरी


झलक दिखा
गुम हुआ सूरज
घना कोहरा

पूस कि रात
फूटपाथ पे मिली
मौत को मात