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गुरुवार, 18 जून 2020

dewdrops - under the basho

you so much, Kala Ramesh, for accepting my haiku and publishing it. I am delighted and deeply grateful.

dewdrops -
the sun clears away 
her name 

*Sunita Agrwal "neh" 
Published on 17/0y/2020 

https://underthebasho.com/current-year/modern-haiku/3288-sunita-agrawal.html

And secure 2nd place in facebook group "Prose and Picture with January Khan 's event *Friday Haiku*"

गुरुवार, 7 फ़रवरी 2019

अहो !वसंत


१)
पीत चुनर
बौर झुमके लाया
पिया वसंत
२)
आये न कंत
 झुलसाये है जिया
हवा बसंती
३)
निगली  बौर
विकिरण राक्षसी
बसंत मौन
४)
प्रणयी नभ
दुल्हन बनी धरा
धुंध उपर्णा
५)
अवनि वधु
धुंध अन्तरपट
व्याकुल नभ
६)
छंटे बादल
सहेजती वसुधा
प्रीत के पल
७)
अहो !वसंत
अमराई में गुँजे/ वीराने में गूंजते
कोकिला स्वर
८)
धूप  के खड़ा
बाँट रहा पलाश
रंग प्रीत का ।
९)
ग़ाँव की सीमा -
आ लिपटी गले से
हवा वसंती

१७ 
अधूरी कृति -
झेलती रात भर 
दर्द प्रसूति

११) 
ठंड इतनी 
सिकुड़ने लगी   है 
खुली खिड़की 

बुधवार, 2 जनवरी 2019

english haiku

playing
with her curly locks -
spring breeze

an invitation card ~
raindrops 
on my window

Wiping
old layer of dust -
Nor'wester

old diary
 fragrance of first rose
still fresh

I C U --
father enquiring about
share rates

long journey …
my haiku published
internationally


family get together -

some new faces added
some lost this year

सोमवार, 18 सितंबर 2017

सोमवार, 7 अगस्त 2017

राखी

रक्षाबंधन ... सावन मस की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला पावन त्यौहार।
१)
भाभी से राखी
बँधा रहा देवर ~
गिरती बूँदे
२)
जाड़े की छुट्टी  ~
भाई को राखी बांध
रही बहना
सभी जानते है ये भाई बहन के असीम प्रेम का पर्व है , भाई बहन की रक्षा करने का संकल्प लेते है ,बहने भाई के दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं।  प्यार मनुहार ,नोकझोक , इस पर्व के उत्साह और आनंद को दोगुना कर देते है। भाई बहन साल भर इस त्यौहार का इन्तजार करते है।  शादी के बाद प्राय भाई बहन के ससुराल जाते है राखी बंधवाने।  बहने रास्ता तकती रहती प्यारे भाई की।  समय के साथ पर्व और उससे सबंधित विचारो में भी परिवर्तन आने लगा है। राखी भी केवल भाई बहन का त्यौहार नहीं रह गया ये भावनाओ का त्यौहार है। जिसके प्रति आपकी भावना पावन  हो उस से आप का रिश्ता बन जाता है।
ऐसी ही एक राखी की बात याद आती है।  मेरे पतिदेव ५ भाईयो में चौथे नंबर पर है।  मेरी शादी के पहले की घटना है।  एक राखी पर बड़ी और छोटी भाभी के भाई आये पर मझली भाई के भाई किसी कारण  से नहीं आ पाए।  शाम को सब ननद ,भाभियाँ ,भाभियो के भाई एक जगह बैठक में इकट्ठे हो कर राखी के पर्व का आनंद ले रहे थे , हंसी ठिठोली उल्लास का माहौल था की पतिदेव ने देखा मझली भाभी की आंखे भीगी हुयी है।  वो समझ गए और झट एक राखी ले कर पहुँच गए भाभी के पास कहा " देवर भी तो भाई समान होता है ,आप मुझे राखी बांध दीजिये।  " सभी हक्के बक्के रह गए कुछ ने चुटकी भी ली कुछ ने रिश्ते की दुहाई देते हुए मना  भी किया पर वो माने नहीं राखी बंधवा के ही माने।  हो सकता है आपको भी अजीब लग रही हो ये बात आप भी ले रहे हो चुटकी पर जहाँ भावना प्रधान होती  इन बातो का कोई अर्थ नहीं।  मेरे मन  में पतिदेव के लिए अपार श्रद्धा उमड़ गयी जब ये घटना सुनी तो।
पर्व और धर्म हमारे लिए है न की हम पर्व या धर्म के लिए | पर्व का अर्थ परिवार और परिचितों के साथ आनंद के कुछ क्षण व्यतीत करना।  बिगड़ते रिश्तो को सम्हालना।  जीवन की कठिनताओं में से कुछ पल सजीवता से जीना।  आज कल  के बच्चे प्रायः पढ़ने के लिए माता पिता परिवार से दूर हॉस्टल में ,दूसरे शहर में रहते है।  इस कारण  से वो आज कल पर्व ,त्यौहार रिश्ते , सबसे से दूर होते जा रहे है ,उन्हें कहाँ समय मिल पाता  है बार बार घर आ कर परिवार के साथ मिल हर छोटा बड़ा त्यौहार मनाने का | मेरी बिटिया भी  अपनी पढ़ाई के सिलसिले में हॉस्टल में ही रहती है।  पिछले ७ साल में उसने केवल २ साल ही भाई को राखी बाँधी है।  पिछले साल से मैंने एक रास्ता निकला।  जब वो जाड़े  की छुट्टियों में आती है तभी उस से उसके भाई को राखी बंधवा देती हूँ और यकीं मानिये दोनों बहुत खुश होते है।  अबकी साल मेरी सहेली ने भी यही किया।  आखिर पर्व त्यौहार हमारी खुशियों के लिए है :) 

रविवार, 24 जुलाई 2016

वर्षा की रुत



बैठे है भरे
किसकी प्रतीक्षा में
मेघ घनेरे ।

 खेत में सूखा
अटके है बादल
नैनो के छोर ।

पी  गया भानु
नदी ,पोखर जल
नलके प्यासे ।

भाँप से बूंदें
जीवन मृत्यु चक्र
गीता प्रत्यक्ष ।

वर्षा की बुँदे
कमर कसे नट
तार से झूले ।

केन्चो ,तितली
सब है आनंदित
वर्षा की रुत ।

published in
https://hindihaiku.wordpress.com/2016/07/24/1651/


रविवार, 19 जून 2016

पिता

१)
रक्षा सूत्र सी
लिपटी इर्द गिर्द
सीख पिता की ।
२)
पिता है वृक्ष
सहते धूप ,वर्षा
खिलेंगे फूल ।

३)
झलके पापा 
बच्चों को समझाते
शब्दों में मेरे ।


रविवार, 8 मई 2016

मैया दुलारे


माँ जल जैसी
मिले जाये जो पात्र
ढलती वैसी ।

पंख ही नहीं
दिशा व हिम्मत भी
माँ ने ही दिया ।

पूत ,कपूत
दोनों नयनतारे
मैया दुलारे ।

साथी से दुरी
गुलाब थी माँ ,हुयी
बाड़ कँटीली  ।

भव्य बँगला
खोजती  विधवा माँ
कक्ष अपना  ।

भीष्ण सुखाड़
सूखा  ना पाई धूप
ममत्व धार।

जब से सृष्टि
प्रभु ने ही सम्हाला
माँ की पदवी   । 

गुरुवार, 31 मार्च 2016

इंसानियत



सूखे नलके
बने फसाद जड़
जब टपके ।

 पंछी को नीर
 प्यासे को  मिले कोड़े
बीमार धर्म  ।

जल के साथ
हुयी बोतलबंद
इंसानियत ।

सुबह सुबह टी वी;पर एक अत्यन्त ही शर्मनाक समाचार देख कर मन बहुत उद्वेलित हो गया । जाने क्या हो रहा है? देवो की इस भूमि पर रहने वाले नरपिचाश कैसे बन रहे ? उफ्फ्फ किसी बच्चे ने दो घूँटपानी अपने सहयात्री की बोतल से बिना अनुमति लिए पी लिया तो उसे चार घंटे चलती ट्रैन की खिड़की से बांध दिया ! उस पर भी जी न भरा तो फिर उसकी बेल्ट से पिटाई की गई !? दो दिन पहले ही प्रधान मंत्री जी "मन की बात " में इसी जल  पर बात कर रहे थे की  कभी अपने घर चिट्ठी पहुँचाने वाले डाकिए को पानी पूछ कर  देखिये उसी कितनी ख़ुशी मिलेगी और आपको संतोष । जिस देश में जल दान को सर्वोच्च दान की श्रेणी में रख गया है वहां ऐसी हैवानियत !? ये वही लोग है जो केवल लाइक्स पाने के लिए गर्मियां आने से पहले व्हाट्सएप और फेस पर फोटो और सन्देश शेयर करते है "कृपया अपने घर के छत या बाहर कहीं खुले के चिड़ियों के लिए पानी रखें "
जी हाँ अब लोग पत्थर हो गए है । धर्म ग्रंथो में लिखी बाते अब अपच होती है अन्धविश्वास की संज्ञा दी जाती है उन्हें । केवल अपना दर्द अपना रह गया । इसलिए जहाँ स्त्री की  पूजा होती थी अब उसके साथ बलात्कार होते है। जरा सी बात पर खून की नदिया बहती है । माँ को ही गलिया देने वाले देशभक्त कहे जाते है। .. जय भारत;
posted from Bloggeroid

मंगलवार, 8 मार्च 2016

ब्याही के स्वप्न



ब्याही के स्वप्न
पारिजात सुमन
झरे रात ही ।

दुर्दिन शाखी
वल्लरी बनी वेलि
कमाऊ पुत्री ।

खिली मंजरी
निखरेगा सौंदर्य
प्रसूति बाद । 

रविवार, 21 फ़रवरी 2016

शहीद को नमन

 एक तरफ देशवासी जहाँ आरक्षण ,अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता इत्यादि मुद्दों को ले कर सड़क जाम , बवाल तोड़फोड़ ,नारेबाजी ,आरोप प्रत्यारोप में व्यस्त है  नेता अपनी कुर्सी की चिंता में वोटो की राजनीती में व्यस्त है  ठीक ऐसे समय में भारत माँ का एक सच्चा सपूत अपने इन्ही  भाई बन्दों की सलामती के लिए  अपने आप को कुर्बान कर देता है आतंकियों से लड़ते लड़ते। . इसे सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य की ये उसी हरियाणा राज्य का निवासी था जींद शहर का रहने वाला जहा के लोगो ने अभी आरक्षण की मांग को लेकर देश में आतंक का माहौल बना रखा है और सभी रास्ते भी बंद किये हुए है और देश के इस सपूत की धरती अपने बेटे के पार्थिव शरीर की राह देख रही  है जो अपने गांव पहुचने के लिए इस बंद से जूझ रही है ।  क्या ये ही है हमारी संस्कृति ? क्या ये दुर्भाग्यपूर्ण नही?  .किसके पूछे जनाब यहाँ तो संवेदनाये ही दफ़न हो चुकी विवेक ने इस देश  का दामन शायद छोड़ दिया है
हे सपूत नमन
-----------------------------------------
कैसे भेजूं मैं
शहीद को नमन
भारत बंद



रविवार, 14 फ़रवरी 2016

प्रीत का सार


बहते पात -
  भेजे है प्रेमपत्र
सिन्धु को सरि  ।

मौन है लब
तुम हो  मेरा प्यार
बोला गुलाब ।

प्रीत का  सार
सिंधु सरि मिलन
स्वत्ता विस्तार ।

सुर्ख  गुलाब
 बना प्रेम प्रतीक
कांटो के  साथ ।

कोई पुकारे
आँचल खींच बोले
मृदु झकोरे ।






बुधवार, 27 जनवरी 2016

स्नोजिला तुफाँ-



बर्फ ही बर्फ
बिछी  हर तरफ  -
रिश्तो के रूप

स्नोजिला तुफाँ-
तकनीकी से स्पर्धा
जीती प्रकृति

बर्फ ही बर्फ -
प्रकृति ने उकेरी
छवि रिश्तों की

हिम संसार -
ले रही है आकार
संवेदनायें

दागे बुलेट
खोलते ही कपाट -
सर्द बयार


बुधवार, 11 नवंबर 2015

दीप काफिले




अम्बर पर
बना रहा रंगोली
रॉकेट बम

सजाये दीप
भू से अंबर तक
रॉकेट बम

 देव दिवाली
जलविहार करे
दीप  काफिले

दिवाली रात
धमाको से आहत
जागी प्रकृति

द्वार अंकित
लक्ष्मी चरण चिन्ह
आशा के दीप

 दीये जलते  -
गुजारे साथ कभी
लम्हे छेड़ते

अखंड दीप
मर के जला गया
आँखों का दानी

दूधिया रात
ढोते महानगर
दीप  का तल

घर अँधेरा
जला रहे दीपक
फोन , नेट में

मासूम बच्चा
जला रहा दीपक
दीपक तले




गुरुवार, 24 सितंबर 2015

टूटा सितारा



आई थी रात
यूँ ही बस मिलने
ठहर गयी

दिखाई दिया
गुमनाम सितारा
टुटा  था  जब

टूटा  सितारा
फिर खो गया कहीं
किसी का  प्यारा

मंगलवार, 22 सितंबर 2015

यादो के झूले


लेती आशीष
छू माता के चरण
वट की जटा

 होले से ठेले
वट की छाँव डले
यादो के झूले

वर्षा के बाद
साफ़ हो गये  दिल
तने पे खुदे





गुरुवार, 30 जुलाई 2015

अनुभूति में प्रकाशित हाइकु - बाँस ,वर्षा



रखते बाँस
अनुभव पोटली
लगा के गाँठ

खोजे पवन
मधुर सरगम
बाँस के वन

वर्षा ने छुआ
झुर्री भरी दिवार
सिसक उठी

नभ में दौड़े
बन ठन बादल
आवारा छोरे

लाये बदरा
परदेशी का ख़त
भीगा भीगा सा

http://www.anubhuti-hindi.org/haiku/vishayanusar/varsha.htm
http://www.anubhuti-hindi.org/sankalan/baans/haiku.htm



बुधवार, 17 जून 2015

बोझिल बचपन



बस्ते से दबा
बोझिल बचपन
खो रहे स्वप्न ।

झरते पत्ते
छात्रावास प्रांगण
सहेजे बच्चे ।
अम्मा के नाम
छात्रावास से पाती
थे कुछ पत्ते।
सहेजे पत्ते
छात्रावास में बच्चे
 दर्द एक सा ।

नही आवारा
भटकता पल्लव
भाग्य का मारा ।

शाख से जुदा
उड़ा हवा में पत्ता
है मनचला ।
शाख से गिरा
थामें धरा आँचल
कांपता पात ।

बनेगे खाद
टूटे कोमल पात
थामे जो धरा ।

कोमल पात
हुआ शाख से जुदा
ले उडी हवा ।

उड़ता पत्ता
अटका झाड़ियो में 
पानी में गत्ता ।

भटके पात
बरगला ले गयी
आतंकी वात ।


     


बुधवार, 15 अप्रैल 2015

आरक्षण का पुल



 पाट न पाई
आरक्षण का पुल
जात  की खाई ।

चुनावी खेल
जाति समीकरण
संसद रेल  ।

वर्ग सामान्य
काम मिला न स्कूल
धिक्कारे कुल ।

मेघा औसत
आरक्षण सौगात
बाबू से ठाट । 








मिटेगा भेद
आरक्षण सन्देश
हारा  उद्देश्य ।

हरि  के पट
खोलेगा आरक्षण
अछूत प्रश्न ।