गुरुवार, 30 जुलाई 2015
बुधवार, 17 जून 2015
बोझिल बचपन
अम्मा के नाम
छात्रावास से पाती
थे कुछ पत्ते।
छात्रावास से पाती
थे कुछ पत्ते।
सहेजे पत्ते
छात्रावास में बच्चे
दर्द एक सा ।
छात्रावास में बच्चे
दर्द एक सा ।
नही आवारा
भटकता पल्लव
भाग्य का मारा ।
शाख से जुदा
उड़ा हवा में पत्ता
है मनचला ।
भटकता पल्लव
भाग्य का मारा ।
शाख से जुदा
उड़ा हवा में पत्ता
है मनचला ।
गुरुवार, 28 मई 2015
जेठ की दुपहरी
1.
आ रे बदरा
लांछ्नाये जलाती
भरो अँचरा
2.
ताप संगत
खिले गुलमोहर
नवरंगत
3.
धूप से मिली
मृदु मंद बयार
लू बन चली
4.
कुछ सूखते
कुछ निखर जाते
ताप से वृक्ष
5.
धूप प्रखर
लम्बी परछाईयाँ
सिमटी घर
6.
पाकर धूप
सिमटी घर
6.
पाकर धूप
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