BLOG DESIGNED BYअरुन शर्मा 'अनन्त'

गुरुवार, 30 जुलाई 2015

अनुभूति में प्रकाशित हाइकु - बाँस ,वर्षा



रखते बाँस
अनुभव पोटली
लगा के गाँठ

खोजे पवन
मधुर सरगम
बाँस के वन

वर्षा ने छुआ
झुर्री भरी दिवार
सिसक उठी

नभ में दौड़े
बन ठन बादल
आवारा छोरे

लाये बदरा
परदेशी का ख़त
भीगा भीगा सा

http://www.anubhuti-hindi.org/haiku/vishayanusar/varsha.htm
http://www.anubhuti-hindi.org/sankalan/baans/haiku.htm



बुधवार, 17 जून 2015

बोझिल बचपन



बस्ते से दबा
बोझिल बचपन
खो रहे स्वप्न ।

झरते पत्ते
छात्रावास प्रांगण
सहेजे बच्चे ।
अम्मा के नाम
छात्रावास से पाती
थे कुछ पत्ते।
सहेजे पत्ते
छात्रावास में बच्चे
 दर्द एक सा ।

नही आवारा
भटकता पल्लव
भाग्य का मारा ।

शाख से जुदा
उड़ा हवा में पत्ता
है मनचला ।
शाख से गिरा
थामें धरा आँचल
कांपता पात ।

बनेगे खाद
टूटे कोमल पात
थामे जो धरा ।

कोमल पात
हुआ शाख से जुदा
ले उडी हवा ।

उड़ता पत्ता
अटका झाड़ियो में 
पानी में गत्ता ।

भटके पात
बरगला ले गयी
आतंकी वात ।


     


गुरुवार, 28 मई 2015

जेठ की दुपहरी



1.
आ रे बदरा

लांछ्नाये जलाती
भरो अँचरा

2.

ताप संगत
खिले गुलमोहर 
नवरंगत

3.

धूप से मिली
मृदु मंद बयार 
लू बन चली
4.
कुछ सूखते
कुछ निखर जाते
ताप से वृक्ष
5. 
धूप प्रखर 
लम्बी परछाईयाँ
सिमटी घर
6.
पाकर धूप 
खिल गए सुमन
निखरा रूप
7.
चिहुँके पथ
जेठ की दुपहरी
स्कूल की छुट्टी
8.
चहके बच्चे 
फुफकारती लू के
टूटे है दंत
९.
धूप में खड़ा
बाँट रहा पलाश
रँग  प्रीत के
10.
शीतल छाँव
धूप का महादान
दंभित तरु
११.
धूप  या छाँव
चलते रहे राही
ढूंढते ठाँव

१२.
गली ,चौबारे
चहक रहे बच्चे
बिसूरती लू ।