BLOG DESIGNED BYअरुन शर्मा 'अनन्त'

मंगलवार, 22 सितंबर 2015

यादो के झूले


लेती आशीष
छू माता के चरण
वट की जटा

 होले से ठेले
वट की छाँव डले
यादो के झूले

वर्षा के बाद
साफ़ हो गये  दिल
तने पे खुदे





गुरुवार, 30 जुलाई 2015

अनुभूति में प्रकाशित हाइकु - बाँस ,वर्षा



रखते बाँस
अनुभव पोटली
लगा के गाँठ

खोजे पवन
मधुर सरगम
बाँस के वन

वर्षा ने छुआ
झुर्री भरी दिवार
सिसक उठी

नभ में दौड़े
बन ठन बादल
आवारा छोरे

लाये बदरा
परदेशी का ख़त
भीगा भीगा सा

http://www.anubhuti-hindi.org/haiku/vishayanusar/varsha.htm
http://www.anubhuti-hindi.org/sankalan/baans/haiku.htm



बुधवार, 17 जून 2015

बोझिल बचपन



बस्ते से दबा
बोझिल बचपन
खो रहे स्वप्न ।

झरते पत्ते
छात्रावास प्रांगण
सहेजे बच्चे ।
अम्मा के नाम
छात्रावास से पाती
थे कुछ पत्ते।
सहेजे पत्ते
छात्रावास में बच्चे
 दर्द एक सा ।

नही आवारा
भटकता पल्लव
भाग्य का मारा ।

शाख से जुदा
उड़ा हवा में पत्ता
है मनचला ।
शाख से गिरा
थामें धरा आँचल
कांपता पात ।

बनेगे खाद
टूटे कोमल पात
थामे जो धरा ।

कोमल पात
हुआ शाख से जुदा
ले उडी हवा ।

उड़ता पत्ता
अटका झाड़ियो में 
पानी में गत्ता ।

भटके पात
बरगला ले गयी
आतंकी वात ।