BLOG DESIGNED BYअरुन शर्मा 'अनन्त'

शुक्रवार, 12 दिसंबर 2014

संस्कृति

शब्द है छोटा
संस्कृति में सिमटे आयाम कई

शब्द है छोटा 
व्यापक परिपेक्ष्य ढोये संस्कृति

पथदर्शक 
विश्वगुरु संस्कृति 
भूली है पथ
संस्कृति सार कर्म धर्म -संज्ञान मोक्ष का द्वार
संस्कृति सार कर्म धर्म -संज्ञान आनंद द्वार

सम्हाले थाती  
प्रवासी भारतीय 
निज संस्कृति 
छोड़ के भोग अपनाता पाश्चात्य पूर्व का योग
आधुनिकता  
बाहरी सजावट सोच आदिम

निज संस्कृति
 निज राष्ट्र तरक्की देगी समृद्धि

रखे सम्हाल देश ,धर्म ,संस्कृति है पहचान

पहन मिनी
मॉडर्न हुई नारी सोच पुरानी
बदली सदी  
बदले परिधान विचार रूढी

वेद पुराण
अमुल्य धरोहर
ज्ञान अपार
प्राचीन ग्रन्थ सांस्कृतिक विरासत मार्गदर्शक
सभ्यता पुष्प संस्कृति है सुरभि फैले सुदूर
सभ्यता गोद  फली फूली संस्कृति प्यारी संतान

प्रेम वाहिका शांतिदूत संस्कृति
झेलती हिंसा
मन संस्कृति  सभ्यता आवरण हर देश की

सिखाती प्रीत
भारतीय संस्कृति गंगा जमुनी
नवीन पीढ़ी  
बन्धनहीन जीती रुग्ण संस्कृति

पूरब त्रस्त 
लुटेरन पछुआ
चीरती वस्त्र


मंगलवार, 2 दिसंबर 2014

आभासी जग



आभासी जग
छलिया मृगतृष्णा 
रहें सजग
आभासी जग
रिश्तों का भ्रमजाल
बुनते  लोग

अंतरजाल
बुने  मकड़जाल
उलझे लोग

घूमे बिल्लौटे
शिकार की तलाश
सभ्य मुखौटे

  तितली  मन 
उड़े  हर  चमन
जोगिया बन

भगवा  चोला
रास  रंग रचाता
ता --थ्यैया  बोला



बुधवार, 26 नवंबर 2014

धुंध के मोती

सोयी कलियाँ
सुख भरी निंदिया
धुंध रजाई

रोई जो दूब
आँसू  पोछने आई
स्नेहिल धूप


धुंध के मोती
हरे दुशाला टाँके
ओढ़े धरती

खड़े हैं ठूँठ
सर्द हवा झेलते
वसंत आस


calling at door
sun disappear
foggyday

मंजिलें वही
कुहासे में खो गए /कुहासे ने निगले
डगर सभी